vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना
»
श्लोक 20
श्लोक
4.5.20
येन वीर: कुरुक्षेत्रमभ्यरक्षत् परंतप:।
अमुञ्चद् धनुषस्तस्य ज्यामक्षय्यां युधिष्ठिर:॥ २०॥
अनुवाद
लेकिन उन्होंने उस धनुष की अटूट डोरी भी काट दी जिससे वीर युधिष्ठिर ने सम्पूर्ण कुरुक्षेत्र की रक्षा की थी।
But he also cut off the inexhaustible string of that bow with which the valiant Yudhishthira had protected the entire Kurukshetra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×