श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 5: पाण्डवोंका विराटनगरके समीप पहुँचकर श्मशानमें एक शमीवृक्षपर अपने अस्त्र-शस्त्र रखना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  4.5.15-16 
उत्पथे हि वने जाता मृगव्यालनिषेविते।
समीपे च श्मशानस्य गहनस्य विशेषत:॥ १५॥
समाधायायुधं शम्यां गच्छामो नगरं प्रति।
एवमत्र यथायोगं विहरिष्याम भारत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यह वृक्ष मार्ग से बहुत दूर वन में है। इसके चारों ओर जंगली पशु और सर्प आदि रहते हैं। विशेषतः यह दुर्गम श्मशान के निकट है; (अतः यहाँ किसी के आने या वृक्ष पर चढ़ने की कोई संभावना नहीं है;) अतः हमें अपने शस्त्र इस शमी वृक्ष पर रखकर नगर में जाना चाहिए। हे भरत! ऐसा करके हम अवसरानुसार यहीं विचरण करेंगे॥ 15-16॥
 
This tree is in the forest, far away from the road. Wild animals and snakes etc. live around it. Especially, it is near an inaccessible cremation ground; (therefore, there is no possibility of anyone coming here or climbing the tree;) Therefore, we should keep our weapons on this Shami tree and go to the city. O Bharata! After doing this, we will wander here as per the opportunity.॥ 15-16॥
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