श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 49: कृपाचार्यका कर्णको फटकारते हुए युद्धके विषयमें अपना विचार बताना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.49.16 
आत्मानंक: समुद्‍बद्‍ध्यकण्ठे बद्‍ध्वामहाशिलाम्।
समुद्रं तरते दोर्भ्यां तत्र किं नाम पौरुषम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जो अपने को जंजीरों में बाँधकर और गले में बड़ी चट्टान बाँधकर दोनों हाथों से तैरकर समुद्र पार कर सकता है, क्या उसमें पुरुषार्थ है? यह तो मूर्खता है॥16॥
 
Who can cross the ocean by swimming with both hands, having bound himself in chains and having tied a huge rock around his neck? Is this manliness in that? That is foolishness.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)