श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 49: कृपाचार्यका कर्णको फटकारते हुए युद्धके विषयमें अपना विचार बताना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  4.49.15 
समिद्धं पावकं चैव घृतमेदोवसाहुतम्।
घृताक्तश्चीरवासास्त्वं मध्येनोत्तर्तुमिच्छसि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अथवा तू अपने शरीर पर घी लगाकर, चिथड़े या छाल पहनकर, घी, चर्बी और चर्बी की आहुतियों से प्रज्वलित अग्नि में से गुजरना चाहता है॥15॥
 
Or, having anointed your body with ghee, and having dressed yourself in rags or bark, you wish to pass through the fire that is blazing with the offerings of ghee, fat and lard.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)