श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 49: कृपाचार्यका कर्णको फटकारते हुए युद्धके विषयमें अपना विचार बताना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.49.14 
अथवा कुञ्जरं मत्तमेक एव चरन् वने।
अनङ्कुशं समारुह्य नगरं गन्तुमिच्छसि॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अथवा वन में अकेले विचरण करते हुए तुम बेलगाम हाथी की पीठ पर बैठकर नगर में प्रवेश करना चाहते हो ॥14॥
 
Or, while roaming alone in the forest, you wish to enter the city sitting on the back of an unbridled elephant.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)