श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 49: कृपाचार्यका कर्णको फटकारते हुए युद्धके विषयमें अपना विचार बताना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.49.11 
एकेन हि त्वया कर्ण किं नामेह कृतं पुरा।
एकैकेन यथा तेषां भूमिपाला वशे कृता:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
परन्तु कर्ण! तुम मुझे बताओ, इस संसार में अकेले रहकर तुमने कौन-सा महान् पुरुषार्थ किया है? प्रत्येक पाण्डव ने भिन्न-भिन्न दिशाओं में जाकर उन दिशाओं के स्वामियों को अपने वश में कर लिया है [क्या तुमने भी ऐसा कोई कार्य किया है?]॥11॥
 
But Karna! You tell me, what great effort have you ever done in this world while being alone? Each of the Pandavas went to different directions and brought the lords of those directions under their control [have you also done such a thing?]॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)