श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 49: कृपाचार्यका कर्णको फटकारते हुए युद्धके विषयमें अपना विचार बताना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.49.10 
तथा निवातकवचा: कालखञ्जाश्च दानवा:।
दैवतैरप्यवध्यास्ते एकेन युधि पातिता:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
निवातकवच और कालखंज जैसे राक्षस देवताओं के लिए भी अजेय थे, लेकिन अर्जुन ने युद्ध में अकेले ही उन सभी को मार डाला।
 
The demons like Nivatakavacha and Kalakhanja were invincible even for the gods, but Arjuna single-handedly killed them all in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)