vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 48: कर्णकी आत्मप्रशंसापूर्ण अहंकारोक्ति
»
श्लोक 8
श्लोक
4.48.8
एष चैव महेष्वासस्त्रिषु लोकेषु विश्रुत:।
अहं चापि नरश्रेष्ठादर्जुनान्नावर: क्वचित्॥ ८॥
अनुवाद
वह तीनों लोकों में महान धनुर्धर के रूप में विख्यात है और मैं भी पुरुषोत्तम अर्जुन से किसी प्रकार भी कम नहीं हूँ ॥8॥
He is renowned in the three worlds as a great archer and I too am in no way inferior to the best of men, Arjuna. ॥ 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×