श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 47: दुर्योधनके द्वारा युद्धका निश्चय तथा कर्णकी उक्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  4.47.7 
अर्थानां च पुनर्द्वैधे नित्यं भवति संशय:।
अन्यथा चिन्तितो ह्यर्थ: पुनर्भवति सोऽन्यथा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जिन विषयों में मनुष्य असमंजस में रहता है, उनमें सदैव संदेह रहता है। किसी विषय का विचार एक प्रकार से होता है, परन्तु जब उसका पता लगाया जाता है, तो वह दूसरे प्रकार का निकलता है।॥7॥
 
‘There is always doubt in those subjects in which one is confused. A subject is thought of in one way, but when it is found out, it turns out to be of a different kind.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)