श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 47: दुर्योधनके द्वारा युद्धका निश्चय तथा कर्णकी उक्ति  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.47.30 
बहून्याश्चर्यरूपाणि कुर्वाणा जनसंसदि।
इज्यास्त्रे चोपसंधाने पण्डितास्तत्र शोभना:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
विद्वानों की महिमा इसी में है कि वे लोगों के साथ मिलकर अनेक आश्चर्यजनक और मनोरंजक कार्य करें, यज्ञ के अस्त्र-शस्त्रों को यथास्थान रखें और हवन आदि अनुष्ठान करें॥30॥
 
The glory of learned men lies in performing many astonishing and entertaining acts in the company of people, and in arranging the sacrificial weapons (vessels) in their proper places, and in performing the ritual of offering, etc.॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)