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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 47: दुर्योधनके द्वारा युद्धका निश्चय तथा कर्णकी उक्ति
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श्लोक 29
श्लोक
4.47.29
प्रासादेषु विचित्रेषु गोष्ठीषूपवनेषु च।
कथा विचित्रा: कुर्वाणा: पण्डितास्तत्र शोभना:॥ २९॥
अनुवाद
'बुद्धिमान लोग तब सुन्दर लगते हैं जब वे सुन्दर महलों और मंदिरों में, सभाओं और उद्यानों में बैठते हैं और विचित्र कहानियाँ सुनाते हैं।
‘Wise men look beautiful when they sit in beautiful palaces and temples, in assemblies and in gardens, and narrate strange tales.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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