श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 47: दुर्योधनके द्वारा युद्धका निश्चय तथा कर्णकी उक्ति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.47.22 
तथा हि दृष्ट्वा बीभत्सुमुपायान्तं प्रशंसति।
यथा सेना न भज्येत तथा नीतिर्विधीयताम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘इसीलिए अर्जुन को आते देखकर वे उसकी प्रशंसा कर रहे हैं। (उनके वचनों से हतोत्साहित होकर) सेना में भगदड़ न मचे, इसका ध्यान रखते हुए तदनुसार नीति बनाओ।॥ 22॥
 
‘That is why on seeing Arjun coming, they are praising him. (Discouraged by their words) Keeping in mind that there should not be a stampede in the army, formulate a policy accordingly.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)