श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 47: दुर्योधनके द्वारा युद्धका निश्चय तथा कर्णकी उक्ति  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.47.19 
शरैरेभि: प्रणुन्नानां भग्नानां गहने वने।
को हि जीवेत् पदातीनां भवेदश्वेषु संशय:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई प्राण बचाने के लिए घने जंगल में भागने की कोशिश करेगा, तो मेरे इन बाणों से वह टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा। इस प्रकार भागने वाले पैदल सैनिकों में से कौन बच सकता है? घुड़सवारों के विषय में तो संदेह है (वे मारे भी जा सकते हैं और भागकर बच भी सकते हैं)॥19॥
 
If anyone tries to escape into the deep forest to save his life, he will be torn to pieces by these arrows of mine. Who among the infantrymen who flee like this can survive? There is doubt about the horsemen (they may be killed or may survive if they flee)'॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)