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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 47: दुर्योधनके द्वारा युद्धका निश्चय तथा कर्णकी उक्ति
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श्लोक 14
श्लोक
4.47.14
तेषामेव महावीर्य: कश्चिदेष पुर:सर:।
अस्मान् जेतुमिहायातो मत्स्यो वापि स्वयं भवेत्॥ १४॥
अनुवाद
उन सैनिकों में कोई अत्यन्त पराक्रमी योद्धा हमें परास्त करने के लिए सेनापति बनकर आया है। यह भी सम्भव है कि वह स्वयं मत्स्यराज ही हो॥14॥
‘Among those soldiers, some very valiant warrior has come as a leader to defeat us. It is also possible that he is Matsyaraj himself.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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