श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन  »  श्लोक 27-28
 
 
श्लोक  4.46.27-28 
शकुनाश्चापसव्या नो वेदयन्ति महद् भयम्॥ २७॥
गोमायुरेष सेनायां रुदन् मध्येन धावति।
अनाहतश्च निष्क्रान्तो महद् वेदयते भयम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
ये पक्षी भी हमारे बाईं ओर उड़कर हमें महान भय की सूचना दे रहे हैं और यह गीदड़ भी बिना आक्रमण किए ही हमारी सेना से चिल्लाता हुआ भाग रहा है और महान भय की सूचना दे रहा है ॥27-28॥
 
These birds too are flying on our left side and are informing us of the great fear. And this jackal, without any attack, running away from our army crying, is also advertising the great fear. ॥27-28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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