शस्त्राणि न प्रकाशन्ते न प्रहृष्यन्ति वाजिन:।
अग्नयश्च न भासन्ते समिद्धास्तन्न शोभनम्॥ २५॥
अनुवाद
अब हमारे हथियार चमक नहीं रहे, घोड़े प्रसन्न नहीं दिख रहे और अग्निहोत्र भी नहीं जल रहा, धधक नहीं रहा। यह सब दुर्भाग्य का संकेत है।
Now our weapons are not shining, the horses do not seem to be happy and the fire of Agnihotra is also not burning and blazing. All this is a sign of misfortune.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥