श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.46.24 
द्रोण उवाच
यथा रथस्य निर्घोषो यथा मेघ उदीर्यते।
कम्पते च यथा भूमिर्नैषोऽन्य: सव्यसाचिन:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
(कौरव सेना में शंख की ध्वनि सुनकर) द्रोणाचार्य बोले - इस रथ की गड़गड़ाहट, इससे जो गर्जना के समान शब्द हो रहा है और इससे जिस प्रकार पृथ्वी हिल रही है, यह सब इस बात का संकेत है कि आने वाला योद्धा कोई और नहीं, बल्कि अर्जुन ही है॥ 24॥
 
(Hearing the sound of the conch shell in the Kaurava army) Dronacharya said - The rumbling sound of this chariot, the sound like thunder from it and the way the earth is shaking due to it, all this indicates that the approaching warrior is none other than Arjuna.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)