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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन
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श्लोक 22
श्लोक
4.46.22
तस्य शङ्खस्य शब्देन रथनेमिस्वनेन च।
गाण्डीवस्य च घोषेण पृथिवी समकम्पत॥ २२॥
अनुवाद
उस शंख की ध्वनि, सारथियों की घरघराहट और गाण्डीव धनुष की टंकार से पृथ्वी कम्पायमान हो गई। 22.
The sound of that conch, the rattling of the charioteers and the twirling of the Gāndīva bow made the earth tremble. 22.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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