श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 46: उत्तरके रथपर अर्जुनको ध्वजकी प्राप्ति, अर्जुनका शंखनाद और द्रोणाचार्यका कौरवोंसे उत्पात-सूचक अपशकुनोंका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.46.18 
व्याकुलाश्च दिश: सर्वा हृदयं व्यथतीव मे।
ध्वजेन पिहिता: सर्वा दिशो न प्रतिभान्ति मे॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सब दिशाओं में आतंक फैल गया है और मेरा हृदय महान पीड़ा में है, इस ध्वजा ने सब दिशाओं को ढक लिया है, इसलिए मुझे कोई दिशा सूझ नहीं रही है ॥18॥
 
Panic has spread in all directions and my heart is in great pain, this flag has covered all directions. Hence I am unable to feel any direction. ॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)