श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 45: अर्जुनद्वारा युद्धकी तैयारी, अस्त्र-शस्त्रोंका स्मरण, उनसे वार्तालाप तथा उत्तरके भयका निवारण  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  4.45.38 
निवातकवचै: सार्धं पौलोमैश्च महाबलै:।
युध्यतो देवराजार्थे क: सहायस्तदाभवत्॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
महाबली निवातकवच और पौलोमा दैत्यों के विरुद्ध युद्ध करते समय देवराज इन्द्र के लिए मेरा सहायक कौन था?॥ 38॥
 
Who was my helper during the battle against the mighty Nivatakavach and Pauloma demons for the king of gods Indra?॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)