श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 45: अर्जुनद्वारा युद्धकी तैयारी, अस्त्र-शस्त्रोंका स्मरण, उनसे वार्तालाप तथा उत्तरके भयका निवारण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.45.33 
उत्तर उवाच
एकस्त्वं पाण्डवश्रेष्ठ बहूनेतान् महारथान्।
कथं जेष्यसि संग्रामे सर्वशस्त्रास्त्रपारगान्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उस समय उत्तरा बोली - हे पाण्डवश्रेष्ठ! आप अकेले हैं, युद्ध में इन सब अस्त्र-शस्त्रों में निपुण इतने सारे कुशल योद्धाओं को कैसे परास्त कर सकेंगे?॥ 33॥
 
At that time Uttara said - O best of the Pandavas! You are alone, how will you be able to defeat so many expert warriors who are adept in all these weapons in the war?॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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