वैशम्पायन उवाच
ततो विमुच्य बाहुभ्यां वलयानि स वीर्यवान्।
चित्रे काञ्चनसंनाहे प्रत्यमुञ्चत् तदा तले॥ २५॥
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - हे जनमेजय! तत्पश्चात् वीर अर्जुन ने अपने हाथों से कंगन और चूड़ियाँ उतार दीं और हथेलियों पर सोने के बने विचित्र कवच धारण कर लिए॥ 25॥
Vaishmpayana says: O Janamejaya! Thereafter the valiant Arjuna removed the bangles and bracelets from his hands and wore strange armour made of gold on his palms.॥ 25॥