श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 45: अर्जुनद्वारा युद्धकी तैयारी, अस्त्र-शस्त्रोंका स्मरण, उनसे वार्तालाप तथा उत्तरके भयका निवारण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.45.19 
दारुको वासुदेवस्य यथा शक्रस्य मातलि:।
तथा मां विद्धि सारथ्ये शिक्षितं नरपुङ्गव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
हे महात्मन! जिस प्रकार भगवान वासुदेव का सारथि दारुक है और इन्द्र का सारथि मातलि है, उसी प्रकार आप भी मुझे सारथि के कार्य में पूर्णतः प्रशिक्षित समझें॥19॥
 
O great man! Just as Lord Vasudev's charioteer is Daruka and Indra's charioteer is Matali, in the same way you should also consider me fully trained in the work of a charioteer. ॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)