उत्तर उवाच
बिभेमि नाहमेतेषां जानामि त्वां स्थिरं युधि।
केशवेनापि संग्रामे साक्षादिन्द्रेण वा समम्॥ १०॥
अनुवाद
उत्तरा ने कहा, 'अब मुझे उनसे कोई भय नहीं है, क्योंकि मैं भली-भांति जानती हूं कि तुम भी भगवान कृष्ण और स्वयं इंद्र की भांति युद्धभूमि में स्थिर रहोगे।'
Uttara said, 'Now I am not afraid of them because I know very well that you will remain stable in the battlefield like Lord Krishna and Indra himself.'