श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 45: अर्जुनद्वारा युद्धकी तैयारी, अस्त्र-शस्त्रोंका स्मरण, उनसे वार्तालाप तथा उत्तरके भयका निवारण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.45.1 
उत्तर उवाच
आस्थाय रुचिरं वीर रथं सारथिना मया।
कतमं यास्यसेऽनीकमुक्तो यास्याम्यहं त्वया॥ १॥
 
 
अनुवाद
उत्तर में कहा - वीर! सुन्दर रथ पर आरूढ़ होकर आप मेरे सारथि बनकर किस सेना की ओर चलेंगे? आप मुझे जहाँ जाने की आज्ञा देंगे, मैं आपके साथ चलूँगा॥1॥
 
The answer said - Braveheart! Mounted on a beautiful chariot, towards which army will you go with me as your charioteer? Wherever you order me to go, I will go with you.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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