श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 43: बृहन्नलाद्वारा उत्तरको पाण्डवोंके आयुधोंका परिचय कराना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.43.23 
यस्त्वयं विपुल: खड्गो गव्ये कोशे समर्पित:।
सहदेवस्य विद्धॺेनं सर्वभारसहं दृढम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
और यह सहदेव की विशाल तलवार है, जो गोचर्म के म्यान में रखी हुई है। इसे तू सब प्रकार के प्रहारों और प्रति प्रहारों को सहने में समर्थ और बलवान जान॥23॥
 
And this is the huge sword of Sahadeva which is kept in a sheath made of cow-skin. Know it to be strong and capable of withstanding all kinds of blows and counter-blows.॥23॥
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि उत्तरगोग्रहे आयुधवर्णनं नाम त्रिचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तरगोग्रहके अवसरपर आयुधवर्णनविषयक तैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)