श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 43: बृहन्नलाद्वारा उत्तरको पाण्डवोंके आयुधोंका परिचय कराना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.43.18 
ये त्विमे निशिता: पीता: पृथवो दीर्घवासस:।
हेमपुङ्खास्त्रपर्वाणो राज्ञ एते महाशरा:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
ये बाण, जो तीखे, जल जैसे, मोटे, बड़े पंखों वाले तथा सोने के बने हुए तीन पंखों वाले हैं, ये सब राजा युधिष्ठिर के महान बाण हैं।
 
These arrows, which are sharp, watery, thick and have large wings and have three wings made of gold, are all great arrows of King Yudhishthika.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)