श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 43: बृहन्नलाद्वारा उत्तरको पाण्डवोंके आयुधोंका परिचय कराना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.43.11 
शलभा यत्र सौवर्णास्तपनीयविचित्रिता:।
एतन्माद्रीसुतस्यापि सहदेवस्य कार्मुकम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जिस धनुष पर स्वर्ण जड़ित मछली के पंख सुशोभित हैं, वह माद्रीनाथ के पुत्र सहदेव का धनुष है। 11.
 
The bow on which the golden studded fish feathers are decorated is the bow of Sahadeva, the son of Madrinath. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)