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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 42: उत्तरका बृहन्नलासे पाण्डवोंके अस्त्र-शस्त्रोंके विषयमें प्रश्न करना
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श्लोक 3
श्लोक
4.42.3
तपनीयस्य शुद्धस्य षष्टिर्यस्येन्द्रगोपका:।
पृष्ठे विभक्ता: शोभन्ते कस्यैतद् धनुरुत्तमम्॥ ३॥
अनुवाद
यह उत्तम धनुष किसका है जिसके पृष्ठभाग पर शुद्ध सुवर्ण से बने हुए वीरबाहुति नामक साठ लाल-पीले कीट पृथक्-पृथक् शोभायमान हो रहे हैं? ॥3॥
Whose is this excellent bow on the back of which sixty red-yellow insects called Veerbahuti made of pure gold are looking beautiful separately? ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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