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mahabharat 4.41.4: बृहन्नला बोली - राजन! इन धनुषों को छूने पर भी आप उपयोग के योग्य और पवित्र बने रहेंगे। डरो मत, ये केवल धनुष हैं, इनमें कोई शव नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 4.41: उत्तरका अर्जुनके आदेशके अनुसार शमीवृक्षसे पाण्डवोंके दिव्य धनुष आदि उतारना   ।   mahabharat पर्व 4: विराट पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.41.4 
बृहन्नलोवाच
व्यवहार्यश्च राजेन्द्र शुचिश्चैव भविष्यसि।
धनूंष्येतानि मा भैस्त्वं शरीरं नात्र विद्यते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
बृहन्नला बोली - राजन! इन धनुषों को छूने पर भी आप उपयोग के योग्य और पवित्र बने रहेंगे। डरो मत, ये केवल धनुष हैं, इनमें कोई शव नहीं है।
 
Brihannala said - King! Even after touching these bows you will remain fit for use and pure. Do not be afraid, these are only bows; there is no corpse in them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)