श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 40: अर्जुनका उत्तरको शमीवृक्षसे अस्त्र उतारनेके लिये आदेश  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.40.1 
वैशम्पायन उवाच
तां शमीमुपसंगम्य पार्थो वैराटिमब्रवीत्।
सुकुमारं समाज्ञाय संग्रामे नातिकोविदम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! उस शमी वृक्ष के पास आकर अर्जुन ने यह जानकर कि विराट का पुत्र उत्तर कोमल है और युद्धकला में पूर्णतः निपुण नहीं है, उससे कहा -॥1॥
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Coming near that Shami tree, Arjuna, knowing that Uttar, the son of Virat, was tender and not fully skilled in the art of war, said to him -॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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