vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 4: धौम्यका पाण्डवोंको राजाके यहाँ रहनेका ढंग बताना और सबका अपने-अपने अभीष्ट स्थानोंको जाना
»
श्लोक 21
श्लोक
4.4.21
न हि पुत्रं न नप्तारं न भ्रातरमरिंदमा:।
समतिक्रान्तमर्यादं पूजयन्ति नराधिपा:॥ २१॥
अनुवाद
क्योंकि शत्रुओं को जीतने वाले राजा मर्यादा का उल्लंघन करने वाले अपने पुत्रों, पौत्रों और भाइयों का भी आदर नहीं करते ॥21॥
Because the kings who conquered the enemy do not respect even their sons, grandchildren and brothers who violate the decorum. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×