vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 39: द्रोणाचार्यद्वारा अर्जुनके अलौकिक पराक्रमकी प्रशंसा
»
श्लोक 9
श्लोक
4.39.9
एष वीरो महेष्वास: सर्वशस्त्रभृतां वर:।
आगत: क्लीबवेषेण पार्थो नास्त्यत्र संशय:॥ ९॥
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं है कि समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ, महाधनुर्धर और वीर अर्जुन नपुंसक का वेश धारण करके आए हैं ॥9॥
There is no doubt that the great archer and brave Arjuna, the best among all weapon bearers, has come in the guise of a eunuch. ॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×