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श्री महाभारत
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अध्याय 39: द्रोणाचार्यद्वारा अर्जुनके अलौकिक पराक्रमकी प्रशंसा
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श्लोक 14
श्लोक
4.39.14
कर्ण उवाच
सदा भवान् फाल्गुनस्य गुणैरस्मान् विकत्थसे।
न चार्जुन: कलापूर्णो मम दुर्योधनस्य च॥ १४॥
अनुवाद
कर्ण ने कहा- आचार्य! आप सदैव हमारे सामने अर्जुन के गुणों की प्रशंसा करते हैं, किन्तु अर्जुन मेरे या दुर्योधन के गुणों का सोलहवाँ भाग भी नहीं है।
Karna said- Acharya! You always praise Arjuna's qualities in front of us, but Arjuna is not even one sixteenth of my or Duryodhan's qualities.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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