श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 38:  »  श्लोक d10-d11h
 
 
श्लोक  4.38.d10-d11h 
(गाण्डीवं पुनरादातुमुपायात् तां शमीं प्रति॥
उत्तरं स समाश्वास्य कृत्वा यन्तारमर्जुन:।)
 
 
अनुवाद
अर्जुन पुनः अपना गांडीव धनुष लाने के लिए उस शमी वृक्ष के पास गए और उत्तरा को अपना सारथी बनने के लिए राजी कर लिया।
 
Arjuna again went to that Shami tree to bring his Gandiva bow. He convinced Uttara to become his charioteer.
 
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि उत्तरगोग्रहे उत्तराश्वासने अष्टात्रिंशोऽध्याय:॥ ३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तर दिशासे गौओंके अपहरणके प्रसंगमें उत्तरके आश्वासनसे सम्बन्ध रखनेवाला अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ९ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६० १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)