मा भैस्त्वं राजपुत्राग्रॺ क्षत्रियोऽसि परंतप।
कथं पुरुषशार्दूल शत्रुमध्ये विषीदसि॥ ४८॥
अनुवाद
हे राजकुमार! डरो मत। तुम शत्रुओं को संताप देने वाले वीर योद्धा हो। तुम क्षत्रिय हो, नरसिंह हो! शत्रुओं के बीच में तुम कैसे दुःखी हो सकते हो?॥48॥
‘O prince! Do not be afraid. You are a brave warrior who torments the enemies! You are a Kshatriya, a lion of men! How can you be sad in the midst of enemies?’॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)