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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 38:
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श्लोक 43
श्लोक
4.38.43
शातकुम्भस्य शुद्धस्य शतं निष्कान् ददामि ते।
मणीनष्टौ च वैदूर्यान् हेमबद्धान् महाप्रभान्॥ ४३॥
अनुवाद
मैं तुम्हें शुद्ध सोने की सौ मुद्राएँ देता हूँ और साथ ही सोने से जड़े हुए आठ अत्यंत चमकीली वैदूर्य मणियाँ भी देता हूँ ॥ 43॥
I give you a hundred coins of pure gold, and also eight vaidurya gems studded with gold that are extremely luminous. ॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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