श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 38:  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.38.33 
क एष वेषसंच्छन्नो भस्मन्येव हुताशन:।
किंचिदस्य यथा पुंस: किंचिदस्य यथा स्त्रिय:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
यह कौन है जो राख में छिपी हुई अग्नि के समान स्त्री का वेश धारण किए हुए है? इसके कुछ वचन पुरुष के और कुछ स्त्री के हैं॥ 33॥
 
‘Who is this who is disguised as a woman like fire hidden in ashes? Some of her words are like those of a man and some are like those of a woman.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)