श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 38:  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.38.29 
बृहन्नलोवाच
नैष शूरै: स्मृतो धर्म: क्षत्रियस्य पलायनम्।
श्रेयस्तु मरणं युद्धे न भीतस्य पलायनम्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
तब बृहन्नला बोली - राजकुमार! वीर योद्धाओं की दृष्टि में क्षत्रिय का युद्ध से भागना धर्म नहीं है। युद्ध करके मर जाना अच्छा है; किन्तु भयभीत होकर भागना कभी अच्छा नहीं होता।
 
Then Brihannala said - Prince! It is not Dharma in the eyes of brave warriors for a Kshatriya to flee from a battle. It is better to die after fighting; but it is never good to flee in fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)