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श्री महाभारत
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पर्व 4: विराट पर्व
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अध्याय 38:
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श्लोक 2
श्लोक
4.38.2
समवेतान् कुरून् सर्वान् जिगीषूनवजित्य वै।
गास्तेषां क्षिप्रमादाय पुनरेष्याम्यहं पुरम्॥ २॥
अनुवाद
मैं विजय की आशा से यहाँ एकत्र हुए समस्त कौरवों को परास्त करके उनसे अपनी गौएँ वापस ले लूँगा और शीघ्र ही अपने नगर को लौट जाऊँगा।॥2॥
I shall defeat all the Kauravas who have gathered here in the hope of victory, take back my cows from them and return to my city soon.'॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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