हे बृहन्न! जैसे खाण्डव वन को जलाते समय बैल के समान वेग वाले अर्जुन को शुभ फल प्राप्त हुआ था, वैसे ही आज जब तुम युद्ध में कौरवों के पास पहुँचोगे, तब राजकुमार उत्तरा सहित तुम्हें भी वही शुभ फल प्राप्त हो॥ ॥ 34॥
O Brihanna! Just as Arjuna, who has the speed of a bull, had received auspiciousness at the time of burning the Khandava forest, may you receive the same auspiciousness today along with prince Uttara when you reach the Kauravas in the war.' ॥ 34॥
इति श्रीमहाभारते विराटपर्वणि गोहरणपर्वणि उत्तरगोग्रहे उत्तरनिर्याणं नाम सप्तत्रिंशोऽध्याय:॥ ३७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत विराटपर्वके अन्तर्गत गोहरणपर्वमें उत्तर दिशाकी ओरसे गौओंके अपहरणके प्रसंगमें राजकुमार उत्तरका युद्धके लिये प्रस्थानविषयक सैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)