vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 4: विराट पर्व
»
अध्याय 37: बृहन्नलाको सारथि बनाकर राजकुमार उत्तरका रणभूमिकी ओर प्रस्थान
»
श्लोक 13
श्लोक
4.37.13
अथैतद् वचनं मेऽद्य नियुक्ता न करिष्यसि।
प्रणयादुच्यमाना त्वं परित्यक्ष्यामि जीवितम्॥ १३॥
अनुवाद
‘मित्र! मैं बड़े प्रेम से यह कह रहा हूँ। यदि आज इतनी विनती करने पर भी तुम मेरी बात न मानोगे, तो मैं प्राण त्याग दूँगा।’॥13॥
‘Friend! I am saying this with great love. If you do not listen to me even after so many requests today, then I will give up my life.'॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×