श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 37: बृहन्नलाको सारथि बनाकर राजकुमार उत्तरका रणभूमिकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.37.13 
अथैतद् वचनं मेऽद्य नियुक्ता न करिष्यसि।
प्रणयादुच्यमाना त्वं परित्यक्ष्यामि जीवितम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘मित्र! मैं बड़े प्रेम से यह कह रहा हूँ। यदि आज इतनी विनती करने पर भी तुम मेरी बात न मानोगे, तो मैं प्राण त्याग दूँगा।’॥13॥
 
‘Friend! I am saying this with great love. If you do not listen to me even after so many requests today, then I will give up my life.'॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)