श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 36: उत्तरका अपने लिये सारथि ढूँढ़नेका प्रस्ताव, अर्जुनकी सम्मतिसे द्रौपदीका बृहन्नलाको सारथि बनानेके लिये सुझाव देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.36.9 
पश्येयुरद्य मे वीर्यं कुरवस्ते समागता:।
किं नु पार्थोऽर्जुन: साक्षादयमस्मान् प्रबाधते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अच्छा, अब जब कौरव यहाँ आ ही गए हैं, तो आज वे मेरा पराक्रम देख लें। तब वे कहेंगे, 'क्या कुन्तीपुत्र अर्जुन ही हमें कष्ट दे रहा है?'॥9॥
 
Well, now that the Kauravas have arrived here, let them see my prowess today. Then they will say, 'Is it Kuntiputra Arjuna himself who is troubling us?'॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)