श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 36: उत्तरका अपने लिये सारथि ढूँढ़नेका प्रस्ताव, अर्जुनकी सम्मतिसे द्रौपदीका बृहन्नलाको सारथि बनानेके लिये सुझाव देना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  4.36.6-7 
दुर्योधनं शान्तनवं कर्णं वैकर्तनं कृपम्।
द्रोणं च सह पुत्रेण महेष्वासान् समागतान्॥ ६॥
वित्रासयित्वा संग्रामे दानवानिव वज्रभृत्।
अनेनैव मुहूर्तेन पुन: प्रत्यानये पशून्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जैसे इन्द्र वज्र धारण करके राक्षसों को भयभीत कर देते हैं, वैसे ही मैं इस समय युद्ध में आये हुए दुर्योधन, शान्तनुनन्दन भीष्म, सूर्यपुत्र कर्ण, कृपाचार्य तथा द्रोणाचार्य सहित उनके पुत्र (अश्वत्थामा) आदि महाधनुर्धरों को भी अत्यन्त भयभीत करके अपने पशुओं को लौटा सकता हूँ।
 
Just as Indra, wielding the thunderbolt, frightens the demons, in the same way, I can bring back my animals at this very moment by giving great fear to the great archers like Duryodhana, Shantanunandan Bhishma, Surya's son Karna, Kripacharya and Dronacharya along with his son (Ashwatthama) who have come here in the battle. 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)