श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 36: उत्तरका अपने लिये सारथि ढूँढ़नेका प्रस्ताव, अर्जुनकी सम्मतिसे द्रौपदीका बृहन्नलाको सारथि बनानेके लिये सुझाव देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.36.20 
उत्तर उवाच
सैरन्ध्रि जानासि तथा युवानं
नपुंसको नैव भवेद् यथासौ।
अहं न शक्नोमि बृहन्नलां शुभे
वक्तुं स्वयं यच्छ हयान् ममेति वै॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उत्तरा ने कहा - सैरन्ध्री! उस युवक में ऐसे गुण हैं कि वह नपुंसक हो ही नहीं सकता; ये बातें तुम भली-भाँति जानती हो; [अतः यदि तुम उसे बता दो, तो अच्छा है।] शुभ! मैं स्वयं बृहन्नला को अपने घोड़ों की लगाम संभालने के लिए नहीं कह सकता।
 
Uttara said - Sairandhri! That young man is blessed with such qualities that he cannot be impotent; you know these things very well; [so if you tell him, it is fine.] Shubh! I myself cannot tell Brihannala to handle the reins of my horses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)