श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 36: उत्तरका अपने लिये सारथि ढूँढ़नेका प्रस्ताव, अर्जुनकी सम्मतिसे द्रौपदीका बृहन्नलाको सारथि बनानेके लिये सुझाव देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.36.14 
वैशम्पायन उवाच
तस्य तद् वचनं स्त्रीषु भाषतश्च पुन: पुन:।
न सामर्षत पाञ्चाली बीभत्सो: परिकीर्तनम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! उत्तरा स्त्रियों के बीच बैठी हुई बार-बार अर्जुन का नाम लेकर अपनी तुलना कर रही थी। पांचाल राजकुमारी द्रौपदी यह सहन नहीं कर सकी। 14.
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Uttara was sitting among the women and was repeatedly boasting by taking Arjun's name in comparison to himself. Panchala princess Draupadi could not tolerate this. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)