श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  4.35.9-10 
दृष्ट्वा भूमिंजयं नाम पुत्रं मत्स्यस्य मानिनम्।
तस्मै तत् सर्वमाचष्ट राष्ट्रस्य पशुकर्षणम्॥ ९॥
षष्टिं गवां सहस्राणि कुरव: कालयन्ति ते।
तद् विजेतुं समुत्तिष्ठ गोधनं राष्ट्रवर्धन॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ ग्वाले ने मत्स्यराज के पुत्र भूमिंजय (उत्तर) से भेंट की और उसे राज्य के पशुओं के अपहरण का समाचार सुनाकर कहा - "राजकुमार! आप इस राष्ट्र को समृद्ध करने वाले हैं। आज कौरव आपकी साठ हजार गौएँ हर ले जा रहे हैं। आप उनके हाथ से उन पशुओं को छीनने के लिए खड़े हो जाइए॥ 9-10॥
 
There, the cowherd met the son of Matsyaraj, Bhuminjaya (Uttar), and told him the news of the abduction of the cattle of the kingdom, saying, "Prince! You are going to make this nation flourish. Today the Kauravas are taking away your sixty thousand cows. Stand up to wrest those cattle from their hands.॥ 9-10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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