श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.35.8 
स प्रविश्य पुरं राज्ञो नृपवेश्माभ्ययात् तत:।
अवतीर्य रथात् तूर्णमाख्यातुं प्रविवेश ह॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजा विराट के नगर में पहुँचकर वह राजमहल के पास गया, रथ से उतरा और तुरन्त महल के अन्दर जाकर उसे यह समाचार सुनाया।
 
On reaching the city of King Virata, he went near the royal palace, got down from the chariot and immediately went inside the palace to inform him about this news.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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