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श्लोक 4.35.8  |
स प्रविश्य पुरं राज्ञो नृपवेश्माभ्ययात् तत:।
अवतीर्य रथात् तूर्णमाख्यातुं प्रविवेश ह॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| राजा विराट के नगर में पहुँचकर वह राजमहल के पास गया, रथ से उतरा और तुरन्त महल के अन्दर जाकर उसे यह समाचार सुनाया। |
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| On reaching the city of King Virata, he went near the royal palace, got down from the chariot and immediately went inside the palace to inform him about this news. |
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