श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  4.35.2-3 
भीष्मो द्रोणश्च कर्णश्च कृपश्च परमास्त्रवित्।
द्रौणिश्च सौबलश्चैव तथा दु:शासन: प्रभो॥ २॥
विविंशतिर्विकर्णश्च चित्रसेनश्च वीर्यवान्।
दुर्मुखो दु:शलश्चैव ये चैवान्ये महारथा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजन! भीष्म, द्रोण, शस्त्रविद्या के श्रेष्ठ विद्वान कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, शकुनि, दुःशासन, विविंशति, विकर्ण, महाबली चित्रसेन, दुर्मुख, दुशाला तथा अन्य महान योद्धा भी दुर्योधन के साथ थे। 2-3॥
 
Rajan! Bhishma, Drona, Karna, the best scholar of weaponry, Kripacharya, Ashvatthama, Shakuni, Dushasana, Vivimshati, Vikarna, the mighty Chitrasen, Durmukh, Dushala and other great warriors were also with Duryodhana. 2-3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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