श्री महाभारत  »  पर्व 4: विराट पर्व  »  अध्याय 35: कौरवोंद्वारा उत्तर दिशाकी ओरसे आकर विराटकी गौओंका अपहरण और गोपाध्यक्षका उत्तरकुमारको युद्धके लिये उत्साह दिलाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  4.35.17 
श्वेता रजतसंकाशा रथे युज्यन्तु ते हया:।
ध्वजं च सिंहं सौवर्णमुच्छ्रयन्तु तव प्रभो॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! अब उन चाँदी के समान चमकने वाले श्वेत घोड़ों को अपने रथ में जोतो और सिंह के चिह्न से सुशोभित एक ऊँची स्वर्णिम ध्वजा फहराओ।' 17.
 
Lord! Now let those white horses shining like silver be harnessed to your chariot and let a high golden flag decorated with the symbol of a lion be hoisted.' 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)